क्या है टैक्स यानि कर
प्रिय पाठकों ,
सामाजिक कल्याण के दृष्टिकोण से सरकार द्वारा आरोपित किया जाने वाला अतिरिक्त मौद्रिक भाग कर कहलाता है। जबकि सरकार के द्वारा प्रदान की गयी सुविधाओं के बदले वहन किया जाने वाला अतिरिक्त मुद्रा का भाग शुल्क कहलाता है। इसके अतिरिक्त कर अनिवार्य होता है जबकि शुल्क स्वैच्छिक होता है।
सब्सिडी- उत्पादन लागत का वह भाग जिसे सरकार के द्वारा वहन किया जाता है सब्सिडी कहलाता है। सब्सिडी के निम्न स्वरूप निर्धारित किये गये हैं-
1. ब्लू सब्सिडी
2. ग्रीन सब्सिडी
3. क्रॅास सब्सिडी
जब सरकार के द्वारा अर्थब्यवस्था के द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्र से सम्बंधित सेवाओं के उत्पादन पर सब्सिडी प्रदान किया जाता है तब इसे ही ब्लू सब्सिडी कहा जाता है। जबकि अर्थब्यवस्था के कृषि क्षेत्र में प्रदान किए गये सब्सिडी को ग्रीन सब्सिडी कहा जाता है। वस्तुतः जब सरकार के द्वारा प्रदान की गयी सब्सिडी की राषि को किसी अन्य माध्यम से पूरा कर लिया जाता है तब सरकार द्वारा प्रदान की गयी ऐसी ही सब्सिडी को क्रास सब्सिडी कहा जाता है। उदाहरण के लिए रेलवे विभाग के द्वारा यात्रा के समय यात्रियों को जो सब्सिडी प्रदान की जाती है उसे वस्तु ढ़ुलाई करने वाली ट्रेन के माध्यम से पूरा कर लिया जाता है। इस तरह रेलवे के द्वारा रेल यात्रियों के रेल यात्रा पर दी गयी सब्सिडी क्रास सब्सिडी कहलाएगी।
प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करः-
प्रत्यक्ष कर एवं अप्रत्यक्ष कर के बीच वर्गीकरण के आधार को समझने के लिए कराधान, कराघात एवं करापात शब्द की अवधारणा को समझना अनिवार्य है। कराधान का शाब्दिक अर्थ होता है अर्थब्यवस्था में कर से सम्बंधित कानून को लागू करना, जबकि कराघात का अर्थ होता है कर का आघात अथवा कर को आरोपित करना एवं करापात का षाब्दिक अर्थ होता है कर के भार को अंतिम रूप में सहन करना।
प्रत्यक्ष करः- कराधान के पश्चात जब किसी ब्यक्ति अथवा संस्था पर कराघात एवं करापात साथ-साथ होता है तब कर की ऐसी ही प्रकृति को प्रत्यक्ष कर कहा जाता है। दूसरे शब्दों में अर्थब्यवस्था में कर से सम्बंधित कानून को लागू करने के बाद जिस ब्यक्ति अथवा संस्था के ऊपर कर को आरोपित किया जात है। उसी ब्यक्ति अथवा संस्था के द्वारा कर के भार का अंतिम रूप में सहन भी कर लिया जाता है, तब कर की ऐसी ही प्रकृति को प्रत्यक्ष कर कहा जाता है। प्रत्यक्ष कर के उदाहरण हैं- आयकर, ब्यय कर, निगम कर, सम्पदा कर, सम्पत्ति कर, उत्तराधिकारकर, धनकर, उपहार कर, मृत्युकर इत्यादि।
आयकर- ब्यक्तियों के ब्यक्तिगत आय के ऊपर एक वित्तीय वर्ष में आरोपित किया जाने वाला कर आय कर कहलाता है। भारत में आयकर सर्वप्रथम लार्ड केनिंग के शासन काल में 1860 ई. में जेम्स विल्सन के द्वारा आरोपित किया गया था। भारत में आयकर 1885 ई. के पूर्व तक अस्थाई रूप से लागू किया जाता रहा, किंतु 1884-85 वित्तीय वर्ष से आयकर को भारत में स्थाई रूप से लागू किया जाने लगा।
ब्यय कर- अर्थब्यवस्था में एक वित्तीय वर्ष के अंतर्गत ब्यक्तियों के कुल क्रय शक्ति के ऊपर आरोपित किया जाने वाला कर ब्यय कर कहलाता है। भारत में ब्यय कर सर्वप्रथम 1956 में केल्डार समीति के सिफारिष पर लागू किया गया था, किन्तु ब्यय कर को 1962 में समाप्त कर दिया गया ।
निगम कर- अर्थब्यवस्था में एक वित्तीय वर्ष में ब्यवसायिक संस्थाओं के कुल लाभ के ऊपर आरोपित किया जाने वाला कर निगम कर कहलाता है। निगम कर को कम्पनी लाभ कर के रूप में भी सम्बोधित किया जाता है। निगम कर को सुपर टैक्स अथवा सर्वोच्च कर भी कहा जाता है।
निगम कर को सर्वोच्च कर कहा जाता है क्यों ?
माना किसी कम्पनी में सदस्यों की कुल संख्या 10 है एवं निगम कर की दर 10 प्रतिषत है। माना कम्पनी केा एक वित्तीय वर्ष में कुल लाभ 200 रूपये का होता है। निगम कर के रूप में 200 का 10 प्रतिषत अर्थात 20 रूपये ले लिया जायेगा। शुद्ध लाभ बचा 180 रूपये शुद्ध लाभ का वितरण कम्पनी के सदस्यों के बीच करने पर प्रत्येक सदस्य को लाभ के रूप में जो 18 रूपये की राषि प्राप्त होती है। सरकार इस ब्यक्तिगत लाभ के ऊपर पुनः कर आरोपित कर देती है। चूंकि कर के ऊपर कर आरोपित किया जाता है। इसलिए ऐसे कर को सर्वाेच्च कर कहा जाता है।
सम्पदा कर- ब्यक्तियों के द्वारा अपने वर्तमान समय तक अर्जित की गयी कुल सम्पत्ति के ऊपर आरोपित किये जाने वाला कर सम्पदा कर कहा जाता है।
सम्पदा कर- ब्यक्तियों के द्वारा अपने वर्तमान समय तक अर्जित की गयी कुल सम्पत्ति के ऊपर आरोपित किये जाने वाला कर सम्पदा कर कहा जाता है।
सम्पत्ति कर- किसी ब्यक्ति के द्वारा उसकी कुल सम्पत्ति में हुई बृद्धि के ऊपर आरोपित किये जाने वाला कर सम्पत्ति कर कहलाता है।
मृत्यु कर- एक ब्यक्ति के द्वारा अपनी सम्पूर्ण जीवन अवधि में अर्जित किए गये कुल सम्पत्ति के ऊपर मृत्यु के पश्चात जो कर आरोपित किया जाता है मृत्यु कर कहलाता है।
उत्तराधिकार कर- ब्यक्ति के मृत्यु के पश्चात छोड़े गये सम्पदा के उत्तराधिकारियों के बीच हस्तांतरण के समय जो कर आरोपित किया जाता है उत्तराधिकार कर कहा जाता है।
अप्रत्यक्ष कर- कराधान के पश्चात जब कराघात कहीं अैार होता है एवं करापात कहीं और होता तब कर की ऐसी प्रकृति को अप्रत्यक्ष कर कहा जाता है। दूसरे शब्दों में अर्थब्यवस्था में कर से सम्बंधित कानून को लागू करने के पश्चात जिस ब्यक्ति के ऊपर अथवा संस्था के ऊपर कर को आरोपित किया जाता है, यदि उस संस्था के द्वारा अथवा उस ब्यक्ति के द्वारा कर के भार का सहन न कर के किसी अन्य ब्यक्ति अथवा संस्था के द्वारा वहन कर लिया जाता है। तब ऐसे ही कर को अप्रत्यक्ष कर कहा जाता है। अप्रत्यक्ष कर के उदाहरण हैं- उत्पाद शुल्क, सीमा षुल्क, प्रति संतुलनकारी शुल्क, सेवा कर, बिक्री कर, मनोरंजनकर, चुंगी इत्यादि।
उत्पाद शुल्क- अर्थब्यवस्था के अंतर्गत सरकार के द्वारा उत्पादन के समय उपलब्ध कराई गयी सुविधाओं के बदले आरोपित किया जाने वाला शुल्क उत्पाद शुल्क कहलाता है।
सीमा शुल्क- सीमा शुल्क आयात शुल्क एवं निर्यात शुल्क का सम्मिलित स्वरूप होता है। वस्तुओं एवं सेवाओं के आयात एवं निर्यात के समय उपलब्ध कराई गयी सुविधाओं के बदले आरोपित किया गया शुल्क सीमा शुल्क कहलाता है। केन्द्र सरकार के करों के दृष्टिकोण से सीमा शुल्क भारत का ही नहीं अपितु संसार का सर्वाधिक प्राचीन शुल्क है। जबकि सम्पूर्ण करों की दृष्टिकोण से संसार का सर्वाधिक प्राचीन शुल्क भूराजस्व है।
सेवा कर- अर्थब्यवस्था में सेवाओं के उत्पादन के समय आरोपित किया जाने वाला कर सेवा कर कहलाता है।
कर से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यः
- अप्रत्यक्ष कर एवं प्रत्यक्ष कर के दृष्टि से केन्द्र सरकार को सर्वाधिक राजस्व अप्रत्यक्ष कर से प्राप्त होता है।
- अप्रत्यक्ष कर की दृंिष्ट से केन्द्र सरकार को सर्वाधिक राजस्व उत्पाद शुल्क से प्राप्त होता है।
- अप्रत्यक्षकर की दृष्टि से केन्द्र सरकार को सर्वाधिक शुद्ध राजस्व सीमा शुल्क से प्राप्त होता है।
- प्रत्यक्ष कर की दृष्टि से केन्द्र सरकार को सर्वाधिक राजस्व निगम कर से प्राप्त होता है।
- भारत के संविधान में कर से सम्बंधित प्रावधान सातवीं अनुसूची में वर्णित है।
- भारत के संविधान में कर सम्बंधित प्रावधान अनुच्छेद 263 से लेकर अनुच्छेद 300 तक वर्णित है।
- एल.के. झा समीति का सम्बंध अप्रत्यक्ष कर से है।
- रेखीय समीति का सम्बंध अप्रत्यक्ष कर से है।
- वांचू समीति का सम्बंध प्रत्यक्षकर से है।
- चेलैय्या समीति का सम्बंध कर संरचना में परिवर्तन से है। चलैय्या समीति ने करों की दरों को हटाने की सिफारिष प्रस्तुत की है। चेलैय्या समीति की सिफारिष पर भारतीय अर्थब्यवस्था में सेवा कर को लागू किया गया।
- भारत की पहली कर मुक्त फिल्म झनक नक पायल बाजे है। इस फिल्म के निर्देषक वी. सान्ताराम हैं।
- स्थाई लेखा संख्या का सम्बंध आयकर से है।
- केलकर समीति का सम्बंध प्रत्यक्षकर एवं अप्रत्यक्षकर दोनों से है। केलकर समीति ने कृषि से प्राप्त आय पर भी कर लगाने की सिफारिष प्रस्तुत की थी।
- आॅपरेषन जेंटल मैन का सम्बंध आयकर विभाग के द्वारा क्रिकेट खिलाड़ियों के ऊपर की गयी छापे की कार्यवाई से है।
- केन्द्रिय करों से प्राप्त राजस्व का वितरण वित्त आयोग की सिफारिष के अनुसार केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के बीच कर दिया जाता है। परंतु निगमकर एवं सीमाषुल्क से प्राप्त राजस्व का वितरण नहीं किया जाता है। दूसरे शब्दों में निगम कर एवं सीमाषुल्क से प्राप्त राजस्व का वितरण राज्य व केन्द्र के बीच नहीं किया जाता है।
वित्त आयोगः- वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के अनुसार भारत का राष्ट्रपति प्रति पाॅंच वर्ष पर अथवा आवष्यकता पड़ने पर करता है। वित्त आयोग में सदस्यों की कुल संख्या अध्यक्ष सहित पाॅंच होती है। वित्त आयोग का मुख्य कार्य केन्द्रिय करों से प्राप्त राजस्व का वितरण केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के बीच करना होता है।
गुलाबी अर्थब्यवस्था- भारतीय अर्थब्यवस्था के संदर्भ में आर्थिक विकास दर आषा के अनुकूल पाये जाने पर इसे गुलाबी अर्थब्यवस्था के नाम से जाना जाता है।
प्रति संतुलन कारी शुल्कः- अंतर्राष्ट्रीय ब्यापार के संदर्भ में आयातित वस्तुओं के उपभोग को हतोत्साहित करने के लिए डंपिंग के प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप जो शुल्क आरोपित किया जाता है। प्रतिसंतुलनकारी शुल्क कहा जाता है। वस्तुतः जब कोई देष अपने देष मेें उत्पादित वस्तुओं को दूसरे देषों में उत्पादन लागत से कम लागत पर बेचना प्रारम्भ कर देता है तब इसे ही डंपिंग कहा जाता है।
- स्वाधीनता के समय अंतर्राष्ट्रीय ब्यापार में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिषत थी। किन्तु कालांतर में चलकर अंतर्राष्ट्रीय ब्यापार में भारत की हिस्सेदारी कम होकर 1 प्रतिषत पर आ गयी है। अंतर्राष्ट्रीय ब्यापार में हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए एवं उत्पाद शुल्क की परम्परागत प्रणाली में ब्याप्त दोष को दूर करने के लिए एल.के.झा समीति के सिफारिष पर भारतीय अर्थब्यवस्था में उत्पादषुल्क के आधुनिक प्रणाली अथवा मूल्यवर्धित कर प्रणाली अर्थात वैल्यू एडेड टैक्स ;ट।ज्द्ध को अपनाया गया।
उत्पाद षुल्क की परम्परागत प्रणाली के अन्तर्गत उत्पादन के प्रत्येक चरण पर शुल्क आरोपित किया जाता रहा जिसका परिणाम यह हुआ कि उत्पाद शुल्क का कुल मूल्य अधिक हो गया । उत्पाद शुल्क का कुल मूल्य अधिक होने से भारतीय अर्थब्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं की लागत बढ़ गयी। वस्तुओं की लागत में इस बृद्धि के कारण अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय अर्थब्यवस्था ने उत्पादित वस्तुओं से प्रतियोगित नहीं कर पायी जिसका परिणाम यह हुआ कि अन्तर्राष्ट्रीय ब्यापार में भारत की हिस्सेदारी निरन्तर कम होती चली गयी मूल्य वर्धित कर प्रणाली के अंतर्गत उत्पादषुल्क उत्पादन के प्रत्येक चरण पर आरोपित न करके उपयोगिता में कुल हुई बृद्धि के ऊपर आरोपित किया जाता है। इसलिए उत्पाद शुल्क का कुल मूल्य बहुत ही कम आता है। शुल्क का मूल्य कम होने से भारतीय अर्थब्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं की कीमतें कम हो जाती हंै, क्योंकि उत्पादन लागत में कमी आ जाती है। उत्पादन लागत में इस कमी के कारण अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय अर्थब्यवस्था में उत्पादित वस्तुएं प्रतियोगिता करने में सक्षम हो गयी। जिसका परिणाम यह हुआ कि अन्तर्राष्ट्रीय ब्यापार में भारत की हिस्सेदारी जो कभी 0.1 प्रतिषत पर थी, वर्तमान समय में 0.8 प्रतिषत पर आ चुकी है। इसी कारण मूल्यवर्धित कर प्रणाली को भारतीय अर्थब्यवस्था में अपना लिया गया।
भारतीय अर्थब्यवस्था में वैट को सर्वप्रथम विनिर्मित वस्तुओं के ऊपर लागू किया गया। विनिर्मीत वस्तुओं के ऊपर लागू करने के पश्चात यहां पर इसे मानवैट ;ड।छट।ज्द्ध कहा गया । विनिर्मित वस्तुओं के ऊपर यह प्रयोग सफल रहा। इसलिए इसका और अधिक विस्तार किया गया। विस्तार के पश्चात यहां पर इसे मोडवैट ;डव्क्ट।ज्द्ध कहा गया। भारतीय अर्थब्यवस्था में कुछ समय पूर्व तक उत्पाद शुल्क की तीन दरें यथा कुछ वस्तुओं पर 8 प्रतिषत की दर से कुछ वस्तुओं पर 16 प्रतिषत की दर से एवं शेष वस्तुओं के ऊपर 24 प्रतिषत की दर से उत्पाद शुल्क लागू किया जा रहा था। किन्तु वर्तमान समय में तीनों दरों को आपस में मिलाकर एकमात्र दर 16 प्रतिषत निर्धारित कर दिया गया है। दूसरे शब्दों में जिन वस्तुओं के ऊपर 8 प्रतिषत की दर से उत्पाद शुल्क लागू किया जा रहा था, उन वस्तुओं के ऊपर 16 प्रतिषत की दर से उत्पादषुल्क लागू किया जाने लगा जिन वस्तुओं के ऊपर 16 प्रतिषत की दर से उत्पाद शुल्क लागू किया जा रहा था उन वस्तुओं के ऊपर 16 प्रतिषत के इस दर को बनाये रखा गया, किंतु जिन वस्तुओं के ऊपर 24 प्रतिषत की दर से उत्पाद शुल्क लागू किया जा रहा था उन वस्तुओं के ऊपर उत्पाद शुल्क की दर को कम करके 16 प्रतिषत कर दिया गया तीनों दरों का केन्द्रीयकरण करने के बाद यहां पर इसे केन्द्रीयकृत मूल्यवर्धित कर प्रणाली या सेनवैट कहा गया।
आयकर लगाने की प्रणालीः- आयकर लगाने की निम्न प्रणाली प्रचलन में रही है.........
1. समानुपातिक प्रणाली
2. प्रगतिषील प्रणाली
3. प्रतिगामी प्रणाली
4. अधोगामी प्रणाली
समानुपातिक प्रणालीः- इस तरह की कर प्रणाली में आय के स्तरों में बृद्धि होने पर भी करों की दरों में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिए श्
आय का स्तर कर की दर
5000.00 5 प्रतिषत
10000.00 5 प्रतिषत
15000.00 5 प्रतिषत
प्रगतिषील प्रणालीः- इस तरह की कर प्रणाली में जैसे-जैसे आय के स्तरों में बृद्धि होती है, करों के दरों में बृद्धि कर दी जाती है। उदाहरण के लिए...........
आय का स्तर कर की दर
5000.0 5 प्रतिषत
10000.00 15 प्रतिषत
15000.00 25 प्रतिषत
प्रतिगामी प्रणालीः- इस तरह की कर प्रणाली में जैसेश्जैसे आय के स्तरों में बृद्धि होती जाती है, वैसेश्वैसे करों की दरों में बृद्धि कर दी जाती है। उदाहरण के लिए............
आय का स्तर कर की दर
5000.00 25 प्रतिषत
10000.00 15 प्रतिषत
15000.00 5 प्रतिषत
अधोगामी प्रणालीः- यह कर प्रणाली प्रगतिषील कर प्रणाली एवं समानुपातिक कर प्रणाली का सम्मिलित रूप होती है। इस तरह के भी कर प्रणाली में आय के स्तरों में बृद्धि के साथ साथ करों के दरों में बृद्धि कर दी जाती है, किन्तु एक निष्चित आय के स्तर के पश्चात आय में बृद्धि होने पर भी करों की दरों में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिए................
आय का स्तर कर की दर
5000.00 5 प्रतिषत
10000.00 15 प्रतिषत
15000.00 25 प्रतिषत
20000.00 25 प्रतिषत
25000.00 25 प्रतिषत
भारतीय अर्थब्यवस्था में आय पर कर लगााने की प्रगतिषील कर प्रणाली ही प्रचलन में है।
अधिभार:- राष्ट्रीय आपदा एवं विपदा के समय कुल हुए नुकसान की भरपाई हेतु जब सरकार के द्वारा कर के अतिरिक्त कर आरोपित किया जाता है तब इसे ही अधिभार कहा जाता है। दूसरे शब्दों में अधिभार विषिष्ट उद्देष्यों के तहत आरोपित किया जाता है। उदाहरण के लिए गुजरात में आये हुए भूकम्प के कारण कुल हुए नुकसान की भरपाई केन्द्र सरकार ने अधिभार को आरोपित करके पूरा किया था।
टोबिन कर:- अंतराष्ट्रीय मुद्रा बाजार के सम्बंध में देषों की मुद्राओं के बीच विनिमय के समय प्रसिद्ध अर्थषास्त्री टोबिन ने कर लगाने का सुझाव प्रस्तुत किया था इन्हीं के नाम पर मुद्राओं के विनिमय के समय आरोपित किया जाने वाला कर टोबिन कर कहलाता है। टोबिनन कर की अवधारणा अभी प्रस्तावित है।
फ्रिंज बेनेफिट टैक्स अथवा अतिरिक्त लाभ कर:- सीमांत लाभ कर अथवा फ्रिंज बेनेफिट टैक्स बजट 2005-06 में लागू किया गया कंपनियों के द्वारा कर्मचारियों को दी जाने वाली अतिरिक्त सुविधाओं के ऊपर जो कर आरोपित किया जाता है सीमांत लाभ कर कहा जाता है।
आदान प्रदान करः- अर्थब्यवस्था के पूंजी बाजार में शेयर के खरीद एवं बिक्री के समय आरोपित किये जाने वाला कर आदान प्रदान कर कहलाता है।
पेग्विन कर:- इस तरह का कर अर्थब्यवस्था के अंतर्गत ऐसी संस्थाओं के ऊपर आरोपित किया जाता है जो पर्यावरण को क्षति पहुॅंचाती हंै।
बिक्री कर:- यह अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण है। यह कर राज्य सरकार के द्वारा आरोपित किया जाता है। राज्य की सीमा के अंतर्गत वस्तुओं के विक्रय के समय आरोपित किया जाने वाला कर विक्री कर कहलाता है। विक्री कर को आरोपित करने वाला पहला राज्य मध्यप्रदेष राज्य है। मध्य प्रदेष सरकार के द्वारा सर्वप्रथम पेट्रोलियम पदार्थेां के ऊपर बिक्री कर को आरोपित किया गया था इसलिए बिक्री कर का एक अन्य नाम पेट्रोल कर भी है। वर्तमान समय में बिक्री कर के नाम को बदल कर ब्यापार कर कर दिया गया है। राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व बिक्री कर से प्राप्त होता है, तत्पष्चात राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व आबकारी शुल्क से प्राप्त होता है। वस्तुतः राज्य की सीमा के अंतर्गत सामाजिक कल्याण को क्षति पहुॅंचाने वाली वस्तुओं के उत्पादन के ऊपर आरोपित कर आबकारी शुल्क कहलाता है। आबकारी शुल्क को राज्य उत्पाद शुल्क के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है।
मनोरंजन कर:- यह अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण है। यह कर भी राज्य सरकार के द्वारा आरोपित किया जाता है। राज्य की सीमा के अंतर्गत मनोरंजन सम्बंधी सुविधा जैसे- सिनेमा, सर्कष इत्यादि को उपलब्ध कराते समय आरोपित किया जाने वाला कर मनोरंजन कर कहलाता है। मनोरंजन कर को आरोपित करने वाला पहला राज्य पष्चिम बंगाल है।
प्रवेष कर:- प्रवेष कर अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण है । यह कर भी राज्य सरकार के द्वारा आरोपित किया जाता है। राज्यों के सीमा पारगमन के समय आरोपित किया जाने वाला कर प्रवेष कर कहलाता है।
सीमांत कर:- यह अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण है। यह जनपद की सीमा पारगमन के समय आरोपित किया जाता है।
चुंगी:- यह कर भी अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण है। जब स्थानिय प्रषासन के द्वारा जनपद के अंतर्गत वस्तुओं के विक्रय के लिए स्थान केा उपलब्ध कराने के बदले जो कर आरोपित किया जाता है चुंगी कहलाता है।
विष्व अर्थब्यवस्था के संदर्भ में मूल्य वर्धित कर प्रणाली अर्थात वैट सिस्टम केा लागू करने वाला पहला देष फ्रांस है। जबकि भारत में वैट को लागू करने वाला पहला राज्य हरियाण राज्य है।
(Manoj Bind)
Thanks sir
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