अतीत के आईने में वंचितो को न्याय दिलाने की जदोजहद

Sunday, November 16, 2014

मेला जहां सुई से लेकर हाथी तक सब बिकता है!


 बिहार की राजधानी पटना से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित गंगा नदी के संगम तट पर हर साल लगने वाले विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला को लेकर एक बड़ा रोचक तथ्य है कि संभवत: यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मेला है जहां छोटी सी सुई से लेकर विशालकाय हाथी तक उपलब्ध है। सोनपुर मेले में आने वाले लोगों को वो तमाम चीजें मिल जाती हैं जिनकी ख्वाहिश लेकर वे देश दुनिया के कोने कोने से यहां पहुंचते हैं। इस मेले में रोजमर्रा की वस्तुओं में सुई से लेकर रसोई के बर्तन तक और फर्नीचर से लेकर साजोसामान की हर वस्तु उपलब्ध है। करीब 20 वर्ग किलोमीटर में फैले इस मेले की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेले के एक छोर से दूसरे छोर तक घूमते घूमते लोग भले ही थक जाएं लेकिन उनकी उत्सुकता बनी रहती है। हालांकि मेले में आने वाले पर्यटकों के खानपान का विशेष प्रबंध रखा गया है। मेले में मौजूद ढ़ाबों और अस्थाई रेस्तरां की कोई कमी नहीं है जहां सैलानियों के लिए देशी विदेशी सभी प्रकार के व्यंजन मौजूद हैं। फिर चाहे बात बिहार की पहचान देशी लिट्टी की हो या फिर विदेशी चाउमिन की। इसके अलावा सोनपुर क्षेत्र में प्रसिद्ध कुछ खास मिठाईयां भी उपलब्ध हैं जिसका लुत्फ लिए बगैर आप खुद को नहीं रोक पाएंगे। दुनिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक सोनपुर पशु मेला का खास आकर्षण हाथी होते हैं। हाथियों को लेकर एक कथा भी प्रचलित है कि हरिहर क्षेत्र के कोनहारा घाट के समीप ही गज (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) का युद्ध हुआ था और जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने स्वयं यहां आकर गज को ग्राह से मुक्ति दिलाई थी। 
हालांकि इस बार प्रशासन ने हाथियों की खरीद बिक्री पर रोक लगा दी है। सोनपुर मेला में हाथियों के अलावा विभिन्न किस्मों के घोड़े, विभिन्न प्रजाति के पक्षी और कई नस्लों के कुत्ते भी आकर्षण का केन्द्र हैं।

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